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हेलो, दोस्तों स्वागत है आप सभी का एक बार फिर से Loveshayari .Shayarzaada.com में।
आज हम आप शभी के लिए लेकर आये है Guzlar shayari जो की आपको पढ़ने में बहुत पसंद आएगा। अगर आप गुलजार का फेन्स है और आप गुलजार शायरी खोज रहे है तो आप सही ब्लॉग में आये है इस ब्लॉग में आपको एक से बढ़कर एक Gulzar Shayari In Hindi पढ़ने को मिलेंगे।
गुलजार कौन था ?
दोस्तों, गुलजार पाकितान से था और इसका जन्म 18 अगस्त जन्म 1836 ईस्वी में झेलम जिले पंजाब में पैदा हुआ था जो की अब पाकितान है गुलजार का बचपन का नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा रखा गया था और और इनका पिता का नाम माखन सिंह कालरा था और माँ का नाम सुजान कौर था जब गुलजार छोटा था तब उनका माँ का मुर्त्यु हो गई थी और जब देश के विभाजन हो रहा था तब इनका परिवार पंजाब के अमृतसर इलाके में बस गया थे। फिर वही से गुलजार साहब मुंबई चले गए थे।
और उसके बाद एक अपना नया जीवन चालू किया। और इसके बाद गुलजार ने मुंबई आकर एक अपना मैकेनिक का काम चालू किऐ। जिससे ऐ मैकेनिक के काम से अपने जिंदगी से जूझ रहे थे तो उनको कवि और कविताओं ने अपनी और खींचने लगा जिससे गुलजार साहब ने अपनी खली समय में अपनी कविता लिखने शुरू कर दिया। और इसके बाद गुलजार साहब ने अपनी गैरेज का काम छोड़ दिया।
जिससे गुलजार साहब को फ़िल्मी की दुनिया में आने में विमल राय,ऋषिकेश मुखर्जी और हेमंत कुमार आदि इन सब के सहयता से अपना काम शुरू किया।गुलजार साहब ने सन 1963 में फ्लिम बंदनी आया था। जिससे गुलजार साहब ने अपना कॅरियर का सुरुआत किये थे। सन 2004 में भारत के सम्मन पझ भूषण से भी नवाज जा चूका था और इसके बाद उन्हे 2009 में फ्लिम स्लम्डाग मिलिनेयर में गुलजार साहब के दुवारा लिखी गई गीत जय हो के लिए उन्हें इनाम मिले थे।
तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान… Gulzar Ki Shayari

बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है…
आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ऐतबार किया
तेरी राहो में बारहा रुक कर
हम ने अपना ही इंतज़ार किया
अब ना मांगेंगे जिंदगी या रब
ये गुनाह हम ने एक बार किया
तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे…
ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,
उसको पढते रहे और जलाते रहे….
देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा
देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,
ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.
काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,
ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,
जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा
नींद उड़ाकर मेरी
कहते है वो कि सो जाओ
कल बात करेंगे,
अब वो ही हमें समझाए कि
कल तक हम क्या करेंगे.
पहले दिन गुजर जाते थे
बात खत्म नहीं होती थी,
अब दिन खत्म हो जाते है
बात शुरू ही नहीं होती…!!
चंद फैसला जरूर रखिए
हर रिश्ते के दरमियान
क्योंकि नहीं भूलती दो चीजें
चाहे जितना भुलाओ
एक “घाव” और दूसरा “लगाव”।
जरूरी नहीं हर रिश्ते को
मोहब्बत का नाम दिया जाए
कुछ रिश्तों के जज़्बात
मोहब्बत से भी बढ़कर होते है.
पलक से पानी गिरा है,
तो उसको गिरने दो
कोई पुरानी तमन्ना,
पिंघल रही होगी!!”

फर्क है…
दोस्ती और मोहब्बत में
बरसों बाद मिलने पर
मोहब्बत नजरें चुरा लेती है
और दोस्ती गले लगा लेती हैं.
किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
बड़ी हसरत से तकती हैं
महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें
उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है
जो कदरें वो सुनाती थी कि जिनके
जो रिश्ते वो सुनाती थी वो सारे उधरे-उधरे हैं
कोई सफा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
कई लफ्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं
बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते
जबां पर जो ज़ायका आता था जो सफ़ा पलटने का
अब ऊँगली क्लिक करने से बस झपकी गुजरती है
किताबों से जो ज़ाती राब्ता था, वो कट गया है
कभी सीने पर रखकर लेट जाते थे
कभी गोदी में लेते थे
कभी घुटनों को अपने रिहल की सूरत बनाकर
नीम सजदे में पढ़ा करते थे, छूते थे जबीं से
वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी
मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
और महके हुए रुक्के
किताबें मँगाने, गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
उनका क्या होगा
वो शायद अब नही होंगे!!
मैं तुझे अपनी आँखों में भर तो लूँ ज़रा,
न जाने क्यों वक़्त को, गुज़रने की हड़बड़ी है|
गुज़र जायेगा मगर.. फिर से आएगा ज़रूर,
ये जीवन दुःख और सुख की कड़ी दर कड़ी है|
हैरत है के अब भी जिंदा हूँ किस तरह,
देख जिंदिगी अब भी उसी मकाम पर खड़ी है|
ख़ामोशी का मतलब सुकून है.. या बेबसी है,
तुझ बिन हर मंज़र में मगर कोई कमी है|
बारिश आती है तो पानी को भी लग जाते हैं पाँव
दर-ओ-दीवार से टकरा के गुज़रता है गली से
और उछलता है छपाकों में
किसी मैच में जीते हुए लड़कों की तरह
जीत कर आते हैं जब मैच गली के लड़के
जूते पहने हुए कैनवस के उछलते हुए गेंदों की तरह
दर-ओ-दीवार से टकरा के गुज़रते हैं
वो पानी के छपाकों की तरह …
अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो कि दास्ताँ आगे और भी है
अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो
अभी तो टूटी है कच्ची मिट्टी, अभी तो बस जिस्म ही गिरे हैं
अभी तो किरदार ही बुझे है,
अभी सुलगते हैं रूह के ग़म
अभी धड़कतें है दर्द दिल के
अभी तो एहसास जी रहा है
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माँगा है जो तुमसे वो ज़्यादा तो नहीं है… Gulzar Shayari Hindi

खाली डिब्बा है फ़क़त, खोला हुआ चीरा हुआ
यूँ ही दीवारों से भिड़ता हुआ, टकराता हुआ
बेवजह सड़कों पे बिखरा हुआ, फैलाया हुआ
ठोकरें खाता हुआ खाली लुढ़कता डिब्बा
आज की रात देखा ना तुमने
कैसे झुक-झुक के कोहनियों के बल
चाँद इतना करीब आया है
आओ तुमको उठा लूँ कंधों पर
तुम उचककर शरीर होठों से चूम लेना
चूम लेना ये चाँद का माथा
माँगा है जो तुमसे वो ज़्यादा तो नहीं है
देने को तो जाँ दे दें, वादा तो नहीं है
कोई तेरे वादों पे जीता है कहाँ
मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी
जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते
इक रह्स्म्यी लकीर बण के
खामोश तैनू तक्दी रवांगी
जा खोरे सूरज दी लौ बण के
तेरे रंगा विच घुलांगी
जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के
कैसे कह दू कि महंगाई बहुत है,
मेरे शहर के चौराहे पर आज भी..
एक रुपये में कई कई दुआएं मिलती है … !
ज़िन्दगी हर पल ढलती है, जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है,
शिकवे कितने भी हो किसी से, फिर भी मुस्कराते रहना,
क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है, बस एक ही बार मिलती है।
देर से गूंजते हैं सन्नाटे,
जैसे हमको पुकारता है कोई.
कल का हर वाक़िया था तुम्हारा,
आज की दास्ताँ है हमारी .
जायका अलग है मेरे लफ्जों का
कोई समझ नहीं पाता
कोई भुला नहीं पाता
क्या पता कब कहां मारेगी
बस कि मैं जिंदगी से डरता हूं
मौत का क्या है एक बार मारेगी

तजुर्बा बता रहा हूं दोस्त
दर्द, गम, डर जो भी हैं
बस तेरे अंदर हैं
खुद के बनाए पिंजरे से निकलकर देख
तू भी एक सिकंदर है
कुछ भी कायम नहीं है, कुछ भी नहीं
और जो कायम है
बस एक मैं हूं
मैं जो पल-पल बदलता रहता हूं
मैं दिया हूं
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अंधेरे से है
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ है
जब तक रास्ते समझ में आते हैं
तब तक लौटने का वक़्त हो जाता है
यही जिंदगी है
तुझ को बेहतर बनाने की कोशिश में
तुझे ही वक्त नहीं दे पा रहे हम
माफ करना ए जिंदगी
तुझे ही नहीं जी पा रहे हम
जिंदगी के किसी मोड़ पर
अगर कुछ फैसला करना हो
तो हमेशा अपने दिल की सुनो
बेशक वह होता लेफ्ट में है
मगर उसके फैसले हमेशा राइट होते हैं
परेशां है इस बात पर वह
कि उन्हें कोई समझ नहीं पाया
जरा सोच कर देखो
तुमने कितनों को समझ लिया
थम के रह जाती है जिंदगी
जब जमके बरसती हैं पुरानी यादें
मुझे ऐसे मरना है जैसे लिखते लिखते
स्याही खत्म हो जाए
मैं कभी सिगरेट पीता नहीं लेकिन
हर आने जाने वाले से पूछ लेता हूँ
माचिस है????
बहुत सी चीजें हैं जिंदगी में जिन्हें
फूंक देता हूँ
रात को उठ ना सका
दरवाज़े की दस्तख़ पे
सुबह बहुत रोया……
तेरे पैरों के निशां देखकर
ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए हैं… Gulzar Sahab Shayari

ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए हैं
फिर भी आँखों में चेहरा तुम्हारा समाये हुए हैं
किताबों पर धुल जमने से कहानी कहाँ बदलती है
आखिर कह ही डाला उसने एक दिन
इस कदर टूटे हो बिखर क्यों नहीं जाते…?
कब तक जिओगे ये दर्द भरी जिंदगी
किसी रात ख़ामोशी से मर क्यों नहीं जाते….!!
गजब है इश्क़ – ऐ – दस्तूर
साथ थे तो एक लफ़्ज़ ना निकला
लवों से मेरे
दूर क्या हुए कलम ने
कहर मचा रखा है
जिनमें जान थी
उन सबका देहांत हुआ
जो चीजें बेजान थी
अबतक जिन्दा हैं
सिर्फ अहसास है यह रूह से
महसूस करो प्यार को प्यार ही रहने दो
कोई नाम ना दो
ख्वाइशें तो आज भी
बगावत करना चाहती हैं
मगर सीख लिया है मैनें
हर बात को सीने में दफ़न करना
जो सोचा है वह झूठ नहीं
महसूस किया जो पाप नहीं
हम रूह की आग में जलते हैं
यह जिस्म का झूठा पाप नहीं
मिलता तो बहुत कुछ है इस जिंदगी में
बस हम गिनती उसी की करते हैं जो
हासिल ना हो सका …….
मेरा क्या था तेरे हिसाब में
मेरा सांस सांस उधार था
जो गुजर गया वो तो वक़्त था
जो बचा रहा वो गुलजार था
बिना नक़्शे के भी पंछी पहुँच जाते हैं
अपने मुकाम तक
एक इंसान ही है जो
दिल से दिल तक पहुँचने में भी
नाकाम रहते हैं

तुम मिले तो क्यों लगा मुझे
खुद से मुलाक़ात हो गयी
कुछ भी तो कहा नहीं मगर
जिंदगी से बात हो गयी
उम्मीद भी अजनबी लगती है
और दर्द पराया लगता है
आईने में जिसको देखा था
बिछड़ा हुआ साया लगता है
उम्र जाया कर दी लोगों ने
औरों के वजूद में नुक्स निकालते निकालते
इतना ही खुद को तराशा होता तो
फ़रिश्ते बन जाते
तुमको बेहतर बनाने की कोशिश में
तुझे ही वक़्त नहीं दे पा रहे हम
माफ़ करना ऐ जिंदगी
तुझे ही नहीं जी पा रहे हम
उम्मीद भी अजनबी लगती है
और दर्द पराया लगता है
आईने में जिसको देखा था
बिछड़ा हुआ साया लगता है
मेरी कोई खता तो साबित कर
जो बुरा हूँ तो बुरा साबित कर
तुम्हें चाहा है कितना तू क्या जानें
चल में बेवफा ही सही
तू अपनी वफ़ा साबित कर
होंठ पे लिए कुछ दिल की बात हम
जागते रहेंगे और कितनी रात हम
मुख़्तसर सी बात है “तुमसे प्यार है”
तुम्हारा इंतज़ार है ………
तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे.
ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,
उसको पढते रहे और जलाते रहे
आप के बाद हर घड़ी हमने आप के साथ ही गुज़ारी है.
रात को दे दो चाँदनी की रिदा, दिन की चादर अभी उतारी है.
शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले कैसी चुप सी चमन में तारी है.
कल का हर वाक़िआ’ तुम्हारा था, आज की दास्ताँ हमारी है.
उसका बादा भी अजीब था
कि जिंदगी भर साथ निभाएंगे
मैनें भी नहीं पूछा
महोब्बत के साथ या यादों के साथ
पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी… Gulzar Shayari Images

मैंने मौत को देखा तो नहीं
पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी
कमबख्त जो भी उससे मिलता हैं
जीना ही छोड़ देता हैं
मैं जब छांव छांव चला था अपना बदन बचा कर
कि रूह को एक खूबसूरत जिस्म दे दूँ
न कोई सिलवट .न दाग कोई
न धूप झुलसे, न चोट खाएं
न जख्म छुए, न दर्द पहुंचे
बस एक कोरी कंवारी सुबह का जिस्म पहना दूँ, रूह को मैं
सूरज झांक के देख रहा था खिड़की से
एक किरण झुमके पर आकर बैठी थी,
और रुख़सार को चूमने वाली थी कि
तुम मुंह मोड़कर चल दीं और बेचारी किरण
फ़र्श पर गिरके चूर हुईं
थोड़ी देर, ज़रा सा और वहीं रूकतीं तो
तेरी यादो के जो आखरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा हम मिटाते रहे,
खत लिखे थे जो तूमने कभी प्यार में,
उसको पढ़ते रहे और जलाते रहे,
सामने आया मेरे देखा भी बात भी कि,
मुस्कुराए भी किसी पहचान के ख़ातिर,
कल भी अखबार था देख लिया रख भी दिया,
समेट लो इन नाजुक पलो को,
ना जाने ये लम्हा हो ना हो,
हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन,
पलो में हम ना हो,
टूट जाना चाहता हूँ बिखर जाना चाहता हूँ,
मैं फिर से निखर जाना चाहता हूँ, माना हैं मुश्किल,
लेकिन मैं गुलजार होना चाहता हूँ,
उन्हें ये जिद थी कि हम बुलाये,
हमे ये उम्मीद थी कि वो पुकारे,
हैं नाम होंठों पे अब भी लेकिन,
आवाज में पड़ गई दरारे,
मैत को तो कोन कभी देखा है,
पर यकीनन बहुत खूबसूरत होगी,
जिससे भी मिलता हैं वो जिना छोड़ देता है,
ऐ हवा उनको दे दो खबर उनको मेरी मैत कि,
और कहना कि कफन कि ख़्वाहिश में मेरी लाश,
उनके आचँल का इंतजार करती हैं,

ना दुर रहने से रिश्ते टुट जाते हैं,
ना पास रहने से दूर जाते हैं,
यह तो ऐहसास के पक्के धागे है,
जो याद करने से और मजबूत हो जाते,
अफसोस होता हैं उस पल का,
जब अपनी पसंद कोई और चुरा लेता हैं,
ख्वाब हम देखते रहते हैं,
और हकीकत कोई और बना लेता हैं,
कितना और दर्द देगा बस इतना बता दे,
ऐसा कर ये खुदा मेरी हस्ती मिटा दे,
यु घुट घुट के जिने से तो मौत बेहतर है,
मैं कभी ना जागू मुझे ऐसी नींद सुला दो,
दिल पर जख्म कुछ ऐसे मिले,
फूलों पर भी सोया ना गया,
दिल तो जल कर राख हो गया,
और आँखो से रोया भी न गया,
अजब है तेरी दुआओ का दस्तूर भी मेरे मौला,
मुहब्बत भी उन्ही को मिलती हैं,
जिन्हें निभानी नहीं आती,
तू चाँद मैं सितारा होता,
आसमान में एक आशिया हमारा होता।
लोग तुझे दूर से देखा करते और
सिर्फ पास रहने का हक हमारा होता।
जब खामोश आँखों से बात होती है,
तो ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,
तेरे ही ख्यालों में खोये रहते हैं,
न जाने कब दिन और कब रात होती है।
मोहब्बत कभी किसी की इजाज़त की मोहताज नहीं,
ये हमेशा से होती चली आई है,
और हमेशा होती रहेगी।
हम जो एक बार चले गये फिर पा न सकोगे,
हम चले जायेंगे वहाँ जहाँ तुम आ न सकोगे,
मिलने के लिए तड़पोगे तो बहुत,
लेकिन हम चले जायेंगे वहाँ जहाँ से फिर बुला न सकोगे।
कितनी कसमे खाते है लोग, कितने वादे करते हैं,
फिर भी लोग क्यों साथ छोड़ जाते है,
हमे तो दर्द फूल के टूटने से भी होता है,
फिर लोग क्यों दिल तोड़ जाते हैं
लोग अक्सर मोहब्बत को भुला देते हैं… Gulzar Shayari On Love

इस जिंदगी में वादे तो सभी किया करते हैं,
लेक़िन साथ कोन है निभाता,
अगर वे बेवफा होकर यादों को भुलाया जाता,
तो फिर मुस्कुरा कर दर्द क्यों छुपाता।
लोग अक्सर मोहब्बत को भुला देते हैं,
कुछ लोग मोहब्बत में रुला देते हैं,
अरे मोहब्बत करना तो गुलाबों से सीखो,
जो खुद टूट कर दो दिलो को मिला देते है।
पहले हम तन्हा थे इस दुनिया की भीड़ में,
सोचा था की शायद कोई नही हमारी तकदीर में,
फिर एक दिन आप आये हमारी जिन्दगी में,
फिर हमने सोचा शायद आप ही थे हमारी हाथो की लकीर में।
हम आपकी सासें बनके आपका साथ निभाएंगे,
यही कोशिश करेंगे कभी नही सतायेंगे,
अगर हमारी मोहब्बत पसन्द न आये तो कह देना,
हम आपकी जिंदगी से बहुत दूर चले जायेगे।
बहुत खूबसूरत है ये आँखे तुम्हारी,
इन्हें बना दो चाहत हमारी,
हम नही मांगते दुनिया की खुशियाँ,
जो तुम बन जाओ मोहब्बत हमारी।
इन सांसो में तेरी यादे बस जाती हैं,
जो याद न करूँ तो मेरी जान जाती है।
मैं कैसे कह दूँ मोहब्बत नही है तुझसे,
जब ये साँसे तुझसे जुड़ जाती हैं।
सुबह होती है शाम होती है,
यूँ ही जिंदगी तमाम होती है,
यूं तो उन्ही का होता है जीना,
जिनकी मोहब्बत में सुबह और शाम होती है।
तुझे क्या पता कि मेरे दिल में,
कितना प्यार है तेरे लिए,
जो कर दूँ बयान तो,
तुझे नींद से नफरत हो जाए!
हमे फिर सुहाना नज़ारा मिला है,
क्योंकि जिंदगी में साथ तुम्हारा मिला है,
अब जिंदगी में कोई ख्वाइश नही रही,
क्योंकि हमे अब तुम्हारी बाहों का सहारा मिला है
दिल का हाल बताना नही आता,
हमे ऐसे किसी को तड़पाना नही आता,
सुनना तो चाहतें हैं हम उनकी आवाज़ को,
पर हमे कोई बात करने का बहाना नही आता।

होती नहीं है मोहब्बत सूरत से,
मोहब्बत तो दिल से होती है,
सूरत उनकी खुद-ब-खुद लगती है प्यारी,
कदर जिनकी दिल में होती है
तू मुझे क्यों इतना याद आता है,
तू मुझे क्यों इतना तड़पाता है,
माना के ज़िन्दगी है सिर्फ तेरे लिए,
फिर मुझे तू क्यों इतना रुलाता है।
तुम्हे देखकर ये निगाह झुक जायेगी,
ख़ामोशी हर बात कह जाएगी,
पद लेना इन निगाहों में अपने प्यार को,
तुम्हरी कसम साडी कायनात वही रुक जाएगी।
अपनी हर सांस में आबाद किया है तुमको,
ऐ मेरी जाना बहुत याद किया है तुमको,
मेरी जिंदगी में तुम नहीं तो कुछ भी नहीं,
अपनी जिंदगी से बढ़कर प्यार किया है तुमको।
तुझे भूलना भी चाहूँ तो भुलाऊँ कैसे,
तेरी याद से अपना दामन छुड़ाऊ तो कैसे,
मेरी हर खुसी हर मुस्कान मोहताज़ है तेरी,
मगर तुझको इसका एहसास दिलाऊ कैसे।
दिल की किताब में गुलाब उनका था,
रात की नींदों में ख्वाब उनका था,
कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा,
मर जायेंगे तुन्हारे बिना ये जबाब उनका था।
सफ़र वहीं तक है जहाँ तक हो तुम,
नज़र वहीं तक है जहाँ तक हो तुम,
हजारों फूल देखें हैं इस गुलशन में मगर,
खुशबू वहीं तक है जहाँ तक हो तुम।
सुकून मिलता है जब बात होती है,
हज़ार रातों में वो एक रात होती है,
निगाह उठा कर जब देखते हैं वो मेरी तरफ,
मेरे लिए वही पल पूरी कायनात होती है।
तमन्ना है मेरी कि आपकी आरज़ू बन जाऊं,
आपकी आँख का तारा न सही आँसू बन जाऊं,
मैं आपकी जिंदगी की खुशी बनूँ या न बनूँ,
पर आपके ग़म में आपका सहारा बन जाऊं।
कैसे बीती रात किसी से मत कहना,
सपनो वाली बात किसी से मत कहना,
कैसे उठे बादल और कहाँ जाकर टकराये,
कैसे हुई बरसात किसी से मत कहना।
मेरे वजूद में काश तू उतर जाये,
मैं देखूं आइना और तू नज़र आये,
तू हो सामने और वक़्त ठहर जाये,
और तुझे देखते हुए ज़िन्दगी गुजर जाये।

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